VIDEO : झीरम में हुए नक्सली घटना को 9 साल हुए पूरे, निगम मंडल उपाध्यक्ष शिव सिंह ठाकुर भी थे घटना में मौजूद, कहा घटना याद कर दहल जाता है दिल…

रायपुर, नितिन नामदेव : झीरम में हुए नक्सली घटना को आज 9 साल पूरे हो गए है. 25 मई 2013 को झीरम की नक्सल हमले में बड़े दिग्गज नेता मारे गए थे. इस घटना में वर्तमान में निगम मंडल के उपाध्यक्ष शिव सिंह ठाकुर भी थे. उनका कहना है की वह घटना याद करके आज भी दिल दहल जाता है।

TCP 24 न्यूज से बातचीत करते हुए शिव सिंह ठाकुर ने कहा की नक्सली हमले में शरीर पर गोली खाने के बाद मैंने और मेरे साथियों को जान बचाने के लिए घंटों गाड़ी छिपना पड़ा था. 25 मई, 2013 को झीरम घाटी में हुए देश के सबसे बड़े नक्सली हमले का वह दिन याद करके आज भी दहल जाता हु।

उन्होंने बताया मेरे शरीर से गोलियां तो निकल गईं, लेकिन पीठ में अभी भी धंसे उनके अवशेष हर पल वहां के दर्द को कुरेद रहे हैं. मुझे याद है कि सुकमा से लौटते वक्त दोपहर 3:30 बजे थे, जब हम झीरम घाटी पहुंचे. गाड़ी में अचानक गोली लगने की आवाज आई। मेरे साथी ने बाहर झांककर देखा तो पहाड़ों में कई नक्सली बंदूक से हमला कर रहे थे। इस बीच मुझे और मेरे साथियों को गोली लग गई। कुछ दूर जाने पर नजरों के सामने धुआं छाया हुआ दिखा।

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कुछ देर में गोलियां और मारो-मारो की आवाज आने लगी। नक्सली कह रहे थे कि महेंद्र कर्मा को सरेंडर करिए। जैसे ही कर्मा सामने आए, नक्सली उन्हें ले गए। बंदूक थामे नक्सली गाड़ियों के पास आकर सभी को हाथ ऊपर करके बाहर निकलने को कहा। हमारी गाड़ी में महिला नक्सली पहुंचीं। जख्मी हालत में जब हम हाथ ऊपर कर नीचे आए तो वे हमें 500 फीट ऊपर पहाड़ी पर ले गए। इस दौरान करीब 60 नक्सलियों के बीच घिरे हमने बचने की उम्मीद ही छोड़ दी थी।

उन्होंने बताया की नक्सली हमला ऐसे हमला रहे थे जैसे किसी ने उन्हें सुपारी दी हो. वह पूछते थे कि नंद कुमार पटेल कौन है. महेंद्र कर्मा कौन है. दिनेश पटेल कौन है. नाम पूछ पूछ कर नक्सली गोली मारते थे नक्सली कहते थे अगर नाम नहीं बताओगे तो सब मारे जाओगे.वह घटना याद करके आज भी मेरा दिल काफी दहल जाता है।

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