Vat Savitri Vrat : सोमवती अमावस्या 30 को, वट सावित्री व्रत 29 को रखना श्रेष्ठ, तिथि को लेकर न हो कन्फ्यूज

रायपुर। वट सावित्री के व्रत को लेकर काफी लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसा पंचांगों की गणना में अंतर के कारण हो रहा है। इसका निवारण अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा ने किया है। निर्णय सिंधु, लिंग पुराण एवं काशी के प्रमुख पारंपरिक पंचांगों की गणना के आधार पर महासभा ने 29 मई को वट सावित्र का व्रत करने को धर्म संगत बताया है।

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राष्ट्रीय महामंत्री पं. कन्हैया त्रिपाठी ने बताया कि वट सावित्री पूजन ज्येष्ठ माह के अमावस्या को मनाई जाती है। यह पूजन इस वर्ष 29 मई को रविवार के दिन होगा। यह अमावस्या पूर्वविद्धा लेनी होती है। इसका तात्पर्य यह है कि चतुर्दशी एवं अमावस्या का संयोग सूर्योदय से तीन मुहूर्त आगे अथवा सूर्यास्त से तीन मुहूर्त बाद होना चाहिए। 29 मई को उपरोक्त मुहूर्त की प्राप्ति हो रही है।

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चतुर्दशी के 18 घटी से अधिक होने एवं अमावस्या को दूषित करने का नियम इस अमावस्या पर लागू नहीं होता। अतः इसी दिन वट सावित्री व्रत, उद्यापन, पूजन का विधान करना कल्याणकारी होगा। काशी खंडोक्त कंचन वट सावित्री का संयुक्त मंदिर दशाश्वमेध क्षेत्र के मीरघाट में धर्मकूप मोहल्ले में है। वटसावित्री के पूजन के लिए यहां दूर दराज से भी महिलाएं प्रतिर्ष आती हैं।

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