भारतीय इतिहास की तीन सबसे खूबसूरत रानी, जिन्हे देखते ही लोग खो बैठते थे अपना होश, एक के तो लिए मारे गए 30 हजार सैनिक…

 

 

 

रायपुर: आज एक ज़माने में जहां लड़कियां सुन्दर दिखने के लिए कई प्रकार के मेकअप करते है लेकिन इतिहास में मेकअप नाम का कुछ चीज़ नहीं होता था उसके बाद भी कुछ लोग अपनी सुंदरता से दूसरो को दीवना बना देते थे,

जी हाँ आज हम आपको भारत के इतिहास के 3 सबसे खूबसूरत रानियां के बारे में बताने जा रहे है, जिनके बारे में आपको शायद ही पता हो ये रानी इतिहास की उन रानियों में शामिल है जिनके सिर्फ एक झलक के लोग दीवाने हुए करते थे, जिनकी प्राकृतिक सुंदरता से एक ही झलक में घायल हो जाते थे, तो आइये जानते है कौन है यह 3 रानियां-

 

 

1. संयोगिता

 

 

संयुक्त कन्नौज के राजा जयचंद की बेटी थी, जो अपने सुंदरता के लिए काफी प्रसिद्ध थी, पृथ्वि राज चौहान और राजा जयचंद के बीच कट्टर दुश्मनी थी फिर संयोगिता ने अपने पिता द्वारा आयोजित स्वयंवर में पृथ्वी राज चौहान के गले में माला डाल कर उनके गंदर्भ विवाह किया, भारत के इतिहास की महत्त्वपूर्ण घटनाओं में संयोगिताहरण गिना जाता है।

 

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पृथ्वीराज की तेरह रानियों में से संयोगिता अति रूपवती थी। संयोगिता को तिलोत्तमा, कान्तिमती, संजुक्ता इत्यादि नामों से भी जाना जाते थे।

2. रानी पदमनी-

 

चितौड़ के राजा, राजा रतन सिंह की पत्नी थी और वह बेहद खूबसूरत थी, और इनके सुंदरता के चर्चे सुन कर डदिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलज़ी ने रानी पदमनी को पाने के लिए चितौड़ में हमला कर दिया, और इस युद्ध में 30 हजार सैनिक मारे गए थे, लेकिन युद्ध जीतने के बाद भी अलाउद्दीन खिलज़ी रानी को नहीं पा सका क्योंकि खिलज़ी उस तक पहुंच सके उससे पहले ही रानी पदमनी ने चित्तौड़ की सभी रानियों के साथ मिल कर अपना जौहर कर लिया था मतलब आग में खुद कर अपनी जान दे दी थी.

 

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3. मीरा बाई –

 

 

मीरा बाई का जन्म 1498 में कुड़की गांव में दूदा जी के चौथे पुत्र रतन सिंह के घर हुआ हुआ था वो भगवान श्री कृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थी, वो अलौकिक सुंदरता का एक रूप थी, पति की मृत्यु के बाद उन्हें पति के साथ सती करने का प्रयास किया गया, किन्तु मीरा इसके लिए तैयार नहीं हुईं। मीरा के पति का अंतिम संस्कार चित्तोड़ में मीरा की अनुपस्थिति में हुआ। पति की मृत्यु पर भी मीरा माता ने अपना श्रृंगार नहीं उतारा, क्योंकि वह गिरधर को अपना पति मानती थी यह उन्ही के भक्ति में हमेशा लीन रहती थी.

 

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