Shani Jayanti : 30 साल बाद शनि जयंती पर अपनी ही राशि में रहेंगे शनिदेव, इस उपाय से सभी संकट होंगे दूर

रायपुर। भगवान शनिदेव की जयंती 30 मई को मनाई जाएगी। इस दिन मंदिरों में शनिदेव का तिल-तेल से अभिषेक के साथ विशेष पूजा आरती होगी। ‘ 30 वर्षों बाद सोमवती अमावस्या और शनि जयंती का शुभ व दुर्लभ मुहूर्त संयोग इस बार 30 मई को बन रहा है। इन 30 वर्षों में पहली बार ऐसा हो रहा है कि शनि जयंती पर शनि महाराज अपनी राशि कुंभ राशि में रहेंगे।

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इस बार शनि जयंती पर सोमवती अमावस्या है। इसके अलावा सुकर्मा योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इस योग में कर्मफलदाता की पूजा करने से मनोकामना पूर्ण होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग कार्यों में सफलता में प्रदान करने वाला माना जाता है।

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शनि जयंती के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7.12 मिनट से शुरु होकर 31 मई को सुबह 5.24 मिनट तक रहेगा। वहीं रात 11.39 मिनट तक सुकर्मा योग रहेगा। मांगलिक कार्यों के लिए दोनों ही योग बहुत शुभ होते है। इसके अलावा सुबह 11.51 मिनट से दोपहर 12.46 मिनट तक पूजा के लिए शुभ समय है।

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शास्त्रों के अनुसार, शनि जयंती पर शनिदेव की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद शनिदेव की मूर्ति पर तेल, माला और प्रसाद आदि अर्पित करें। शनिदेव के चरणों में काले उड़द और तिल चढ़ाएं। इसके बाद तेल का दीपक जलाकर शनि चालीसा का पाठ करें। इस दिन व्रत करने वालों पर शनिदेव की विशेष कृपा होती है। शनि जयंती के दिन किसी गरीब या निर्धन को दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से जीवन के सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों के अनुसार, शनिदेव जातक को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में व्यक्ति को उसके कर्म के हिसाब से फल मिलते हैं।

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