RAILWAY NEWS : दो महीने में चार बार बेपटरी हुई ट्रेन, जांच के बाद भी बिलासपुर रूट में की पटरियों में सर्वाधिक घटनाएं,

 

रायपुर। प्रदेश में ट्रेनों के रद्द होने से बीते दो महीने से यात्री खासे परेशान हैं, लेकिन इसी बीच बिलासपुर और छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र बॉर्डर में ट्रेनों की पटरी से उतरने की चार घटनाएं भी सामने आई हैं। इससे सुरक्षा के दावों पर सवाल उठ रहे हैं। ट्रेन बेपटरी होने का ताजा मामला 31 मई को बिलासपुर स्टेशन से पहले सामने आया। यहां टाटा-इतवारी एक्सप्रेस बेपटरी हो गई। घटना के वक्त ट्रेन में यात्री सवार थे, इसलिए हड़कंप मच गया। ट्रेन की रफ्तार कम होने की वजह से लोको पायलेट ने तत्परता से ट्रेन को समय रहते रोक लिया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

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दरअसल बिलासपुर स्टेशन से पहले रात लगभग 1 बजे कोच के चार पहिए पटरी छोड़कर स्लीपर पर दाैड़ने लगे। इससे यात्रियों को अचानक झटका लगा, जिसके बाद ट्रेन में मौजूद रेलवे के अधिकारी पटरियों की जांच करने दौड़े। इस घटना से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन दिनभर में 5 से अधिक ट्रेनें घटना की वजह से प्रभावित हुई। पूरी रात जद्दोजहद के बाद सुबह पांच बजे के बाद उतरे पहिए को पटरी पर लाया गया। इसके बाद ट्रेन रवाना हुई। ट्रेनों के बेपटरी होने की घटनाएं इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि रेल पटरियों को दुरुस्त करने और ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इसके बावजूद ट्रेनों के पटरियों से उतरने की घटना कम नहीं हो रही है।

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अप्रैल 18 – दरेकसा

दक्षिण पूर्व मध्य रेल के नागपुर रेल मंडल के दरेकसा सालेकसा रेलवे स्टेशन में 18 अप्रैल को मालगाड़ी के पटरी से उतरने की खबर सामने आई थी। इसके चलते कई ट्रेनों का रुट बदला गया था। रेलवे इंजीनियर का कहना है, डोंगरगढ़ से नागपुर के बीच पटरियों की स्थिति हर मौसम में बदलती रहती है। मालगाड़ी पटरी से जहां उतरी थी उसके थोड़े ही दूर में ट्रैक मरम्मत का कार्य चल रहा था।

 

अप्रैल 19- बिलासपुर रूट

रेलवे इंजीनियर के अनुसार 19 अप्रैल को बिलासपुर से उसलापुर के बीच मालगाड़ी का इंजन पटरी से उतर गया था, जिसके बाद बिलासपुर से रेलवे ने टीम इंजन को पटरी में वापस लाया। इंजन के बेपटरी होने के कारण का रेलवे अब भी जांच कर रही है। इंजीनियरों का कहना है, पटरियों में बदलाव होने से ट्रेन पटरी से उतर जाती है। ज्यादातर घटना इसी वजह से होती है। सर्दी में रेल पटरी सिकुड़ने लगती है, लेकिन गर्मी में रेल पटरी फैलती है। इस वजह से भी पहिए उतर जाते हैं।

5 मई – दंतेवाड़ा

ईस्ट कोस्ट रेलवे के नक्सल प्रभावित क्षेत्र दंतेवाड़ा में भी मालगाड़ी के पटरी से उतरने की जानकारी सामने आई है। 5 मई को दंतेवाड़ा रेलवे ट्रैक में मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी। हालांकि मालगाड़ी का एक यार्ड पटरी से उतरा था। लोको पायलट ने समय रहते मालगाड़ी को रोक दिया। रेलवे इंजीनियर का कहना है, नक्सल प्रभावित क्षेत्र में मालगाड़ी अधिक उतरती है। नक्सली भी कई बार पटरी को क्षतिग्रस्त कर देते है।

मार्च 29 – बिलासपुर स्टेशन

बिलासपुर रेल मंडल में 29 मार्च को 2 मालगाड़ियों की टक्कर से रेल व्यवस्था बेपटरी हो गई थी। रायगढ़ के पास जामगांव स्टेशन में दो मालगाड़ियों के पीछे से टकराने की घटना से 18 वैगन बेपटरी हुई थी, जिसके चलते अप व डाउन दोनों लाइन प्रभावित थी। इसके अलावा इसी महीने बिलासपुर स्टेशन में दुर्ग-निजामुद्दीन एक्सप्रेस का इंजन के चार पहिए यार्ड में उतरा था। यह घटना जब हुई थी उसके महीने भर पहले भी एक डीजल इंजन के भी चार चक्के उतर गए थे। इंजन की गति धीमी थी। इसलिए अधिक दूर तक चलने के बजाय वहीं रुक गया गया।

 

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