International Tea Day 2022 : चुस्कियों के साथ जाने चाय का ख़ास सफर, कौन सी चाय है कितनी फायदेमंद

Raipur : International Tea Day पुराने समय से लेकर आज भी लोगो के बीच चाय को लेकर उत्सुकता अभी भी बरकरार है। हर की की दिन की शुरुआत चाय से शुर हो कर चाय पे ही अंत होती हैं। आज के दौर में चाय केवल जरूरत ही नहीं बल्कि मोहब्बत बन चुकिओ हैं। जिनकी वजह से कुछ लोग चाय लवर्स के नाम से भी पहचाने जाने लगे हैं। लेकिन बहुत काम लोगों को ही इस बात की जानकारी हैं की इस चाय की शुरआत कब और कैसे हुई थी।

ऐसे हुई थी चाय की खोज

कहा जाता है की क़रीब 2700 ईसापूर्व चीनी शासक शेन नुंग बग़ीचे में बैठे गर्म पानी पी रहे थे। तभी एक पेड़ की पत्ती उस पानी में आ गिरी जिससे उसका रंग बदला और महक भी उठी। International Tea Day राजा ने चखा तो उन्हें इसका स्वाद बड़ा पसंद आया और इस तरह चाय का आविष्कार हुआ। वहीं एक और कथा के अनुसार छठवीं शताब्दी में चीन के हुनान प्रांत में भारतीय बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म बिना सोए ध्यान साधना करते थे। वे जागे रहने के लिए एक ख़ास पौधे की पत्तियां चबाते थे और बाद में यही पौधा चाय के पौधे के रूप में पहचाना गया।

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भारत में ऐसे हुई चाय की एंट्री International Tea Day 2022

International Tea Day 1824 में बर्मा (म्यांमार) और असम की सीमांत पहाड़ियों पर चाय के पौधे पाए गए। अंग्रेज़ों ने चाय उत्पादन की शुरुआत 1836 में भारत और 1867 में श्रीलंका में की। पहले खेती के लिए बीज चीन से आते थे लेकिन बाद में असम चाय के बीज़ों का उपयोग होने लगा। भारत में चाय का उत्पादन मूल रूप से ब्रिटेन के बाज़ारों में चाय की मांग को पूरा करने के लिए किया गया था। उन्नीसवी शताब्दी के उत्तरार्ध तक भारत में चाय की खपत न के बराबर थी। लेकिन आज भारत के हर चौराहे, नुक्कड़ पर आपको कुछ मिले न मिले चाय ज़रूर मिल जाएगी।

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चाय की खेती International Tea Day 2022

सबसे पहले सन् 1815 में कुछ अँग्रेज़ यात्रियों का ध्यान असम में उगने वाली चाय की झाड़ियों पर गया जिससे स्थानीय क़बाइली लोग एक पेय बनाकर पीते थे। भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड बैंटिक ने 1834 में चाय की परंपरा भारत में शुरू करने और उसका उत्पादन करने की संभावना तलाश करने के लिए एक समिति का गठन किया। इसके बाद 1835 में असम में चाय के बाग़ लगाए गए।

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चाय का वर्गीकरण खेती के स्थान के हिसाब से किया जाता है। जैसे चीनी, जापानी, श्रीलंका, इंडोनेशिया और अफ्रीकन चाय। कुछ नाम क्षेत्र विशेष के अनुसार हैं जैसे भारत में दार्जिलिंग, असम, नीलगिरी, श्रीलंका में उवा और डिम्बुला, चीन के अन्हुई प्रांत के कीमन क्षेत्र की कीमुन चाय और जापान की एंशु चाय।

International Tea Day वाइट टी शुद्ध और सभी चाय में सबसे कम प्रोसेस्ड होती है। ग्रीन टी सबसे मशहूर और एशिया में ख़ासी पसंद की जाती है। ओलांग टी चीनी चाय है जो चाइनीज़ रेस्त्रां में परोसी जाती है। ब्लैक टी को केवल गर्म पानी में पत्तियां डालकर या दूध और शक्कर के साथ भी पिया जाता है। हर्बल टी में किसी भी प्रकार की चाय की पत्तियां नहीं डाली जाती हैं।

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कितने प्रकार की होती हैं और कौनसी है ज्यादा फायदेमंद

रात में सोने से पहले आपको लैवेंडर फ्लेवर टी पीनी चाहिए क्योंकि इसकी खुशबू आपके मन और शरीर को आराम के साथ-साथ ताज़गी भी देती है। लैवेंडर फ्लेवर टी विधि :- 2 कप अबलते पानी में आधा चम्मच लैवेंडर डालकर गैस बंद कर दें। अब लैवेंडर का अर्क निकलने तक उसी में रहने दें. इस प्रक्रिया में 15 से 20 मिनट भी लग सकता है. आप चाहें तो इसे ऐसे ही पिएं या फिर फ्रिज में ठंडा कर भी पी सकते हैं।

टेंशन रिलीज करने के लिए आप कैमोमाइल चाय का सेवन करें। कैमोमाइल चाय को तनाव दूर करने के लिए सबसे अच्छा माना जात है। कैमोमाइल चाय की विधि :- 240 मिली पानी गर्म करें। ध्यान रखें कि पानी को उबालना नहीं है। अब इस पानी में 1 बड़ा चम्मच कैमोमाइल के सूखे फूल डालें। इसका अर्क निकल जाए तो इसे छान कर सर्व करें।

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अगर आप अपने आप को थका हुआ महसूस कर रहें हैं तो ब्लैक टी आपकी एनर्जी वापस ला सकती है। ब्लैक टी बनाने के लिए 2 कप पानी को अच्छे से उबाल लें अब असमें बहुत थोड़ी सी चाय पत्ती डालकर ऊपर से ढक दें. 3 से 4 मिनट बाद छान लें। आप ब्लैक टी को चीनी मिला कर भी पी सकते हैं और बिना चीनी के भी पी सकते हैं।

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-चाय 300 ई. से दैनिक पेय बनी हुई है।1610 में डच व्यापारी चाय को चीन से यूरोप ले गए और धीरे-धीरे ये पूरी दुनिया की प्रिय पेय पदार्थ बन गई। विश्व में चाय उत्पादन में भारत का पहला स्थान है। भारत में चाय पहली बार सन् 1834 में अंग्रेज लेकर आए। हालांकि, जंगली अवस्था में यह असम में पहले से ही पैदा होती थी। सन् 1815 में अंग्रेज यात्रियों का ध्यान असम में उगने वाली चाय की झाड़ियों पर गया।

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असम के स्थानीय कबाइली लोग इसका पेय बनाकर पहले से ही पीते थे। भारत के तत्कालिक गर्वनर जनरल लॉर्ड बैंटिक ने भारत में चाय की परंपरा शुरू करने और उसके उत्पादन की संभावना तलाश करने के लिए एक समिति का गठन किया। 1835 में असम में चाय के बाग लगाए गए। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग क्षेत्र में पैदा होने वाली चाय सबसे ज़्यादा स्वादिष्ट होती है। असम की चाय तेज सुगंध और रंग के लिए प्रसिद्ध है। 2007-2008 में चाय के निर्यात से भारत को 2034 करोड़ की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई थी।

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