Astrological rules : घर में होते है रोज कलेश तो इन चीज़ों से आज ही बनाए दुरी, एक दिन में घर में लौटेगी आपकी खुशियां

 

रायपुर। जिस व्यक्ति के घर में आए दिन झगड़े होते रहते हैं और कलह कायम रहती है, उसकी कुंडली में चतुर्थ भाव का दोष पाया जाता है। साथ ही साथ लग्न इन हालात के ऊपर अधिकार पाने में असक्षम होता है. कई बार यही छोटी-मोटी नोकझोंक बड़े झगड़े का कारण बन जाती है, जिसे ज्‍योतिष शास्‍त्र में गृह क्‍लेश कहा गया है। यह गृह क्‍लेश न केवल रिश्‍तों में कड़वाहट लाता है बल्कि व्‍यक्ति के जीवन से सारी खुशियां ही छीन लेता है। महिलाऐं घरेलु जीवन में की गई छोटी गलती बढ़ी साबित हो जाती है।  आज ज्योतिष से जानते हुए गृह कलेश का कारण और बचाव।

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ज्योतिष के मुताबिक रोटियों का संबन्ध सूर्य और मंगल ग्रह से माना गया है क्योंकि रोटी हमारे शरीर को एनर्जी देने का काम करती है. लेकिन जब हम आटा फ्रिज में रखने के बाद उपयोग करते हैं तो ये बासी हो जाता है. बासी आटे का संबन्ध राहु से माना गया है. राहु मानसिक स्थिति को संतुलित नहीं रहने देता. ऐसे में जब इस आटे से बनी रोटियां घर के सदस्य खाते हैं, उनके अंदर भ्रम और झगड़े की प्रवृत्ति पैदा होती है, उनकी आवाज तेज हो जाती है, सहन शक्ति कम हो जाती है. निर्णय क्षमता प्रभावित होती है. ऐसे में कई बार वे गलत निर्णय ले लेते हैं. इससे घर में क्लेश और झगड़ा पैदा होता है. अगर आप वाकई घर में शांति चाहते हैं तो रोजाना ताजा आटा गूंथकर ही रोटी बनाएं.

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अगर बासी आटे के नुकसान का वैज्ञानिक पक्ष देखें तो बासी आटे में बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं, जो हमारे शरीर को एनर्जी नहीं देते, बल्कि सुस्त कर देते हैं और बीमार बनाते हैं. ऐसे में हमारी कार्यक्षमता प्रभावित होती है. इसका असर हमारी आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है. ज्योतिष की नजर से देखा जाए तो गिनकर रोटियां बनाना शुभ नहीं माना जाता. इससे परिवार की बरकत पर असर पड़ता है. ज्योतिष के अनुसार हर किसी को अपने परिवार की जरूरत के अनुसार जितनी रोटियां बनानी हैं, उससे 4 या 5 रोटियां ज्यादा बनानी चाहिए. पहले के समय में कई बार घर में मेहमान अचानक से आ जाते थे, ऐसे में उन्हें भूखा नहीं रहना पड़ता था. आज के समय में बेशक मेहमानों का ये चलन कम हो गया है, लेकिन फिर भी बरकत के लिए कम से कम दो रोटी ज्यादा बनवाएं. अगले दिन इन्हें जानवरों और पक्षियों को खिला दें.

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